Saturday, 26 August 2023

पिछले जन्म के अधूरे कर्म और केतु -एक ज्योतिषीय विश्लेषण how to know our past life karma

पिछले जन्म के अधूरे कर्म और केतु -एक ज्योतिषीय विश्लेषण (how to know our past life karma)

नमस्कार मित्रो , 
 आज के लेख में हम चर्चा करेंगे हमारे की किस तरह से केतु हमारे पिछले जन्म के अधूरे कर्मो के बारे में जानकारी देता है आजकल अधिकांश लोगो के मन में एक जिज्ञासा रहती है की पिछले जन्म के कौन से कर्म है जो अधूरे रह गए है या फिर ऐसे कौन से कर्म है जिनका परिणाम हम आज भुगतना पड़ रहा है जैसा की हम सब सब जानते है की जीवन के आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी है इच्छा और मुक्ति हमारा जीवन इन्ही दोनों चीजों के बीच झूलता रहता है ज्योतिष में राहु इच्छा को दर्शाता है और केतु मुक्ति को इसलिए कलयुग में राहु और केतु की प्रसांगिकता और बढ़ जाती है ज्योतिष में राहु और केतु छाया ग्रह माने जाते है इसलिए अपनी इच्छापूर्ति के लिए राहु केतु को समझना बहुत जरूरी है इच्छा तभी पूरी होगी जब आप अपने पिछले जन्म के अधूरे कर्मो से मुक्त हो जाओगे या यूँ समझ सकते है की राहु अगर ताला है तो केतु उसकी चाभी 



अब कुंडली के माध्यम से समझते है की केतु किस तरह से हमारे अधूरे कर्मो को दर्शाता है 

 यदि कुंडली के पहले भाव में केतु हो - पिछले जन्म में आपके स्वयं से संबधित कर्म अधूरे होंगे जैसे पिछले जन्म में आप किसी चीज की खोज में थे या आपने अपने लिए कोई लक्ष्य बनाया था और उसे पूरा नहीं कर पाए तो इस जन्म में कुंडली केतु अच्छा हुआ तो आप पूरी तन्यमता से कार्यों को करेंगे अन्यथा केतु आपको कार्य ठीक से पूरा नहीं होने देगा 

 यदि दूसरे भाव में केतु हो-पिछले जन्म में अपने परिवार ,धन ,वाणी से सम्बंधित कार्य अधूरे होते है , इस जन्म में आपके ऊपर अपने परिवार की जिम्मेदारी बहुत होगी , 

यदि केतु तीसरे भाव में हो तो आपके अपने छोटे भाई बहनो से सम्बंधित,सेना,साहस ,खेल से सम्बंधित कार्य अधूरे रहते है 
  यदि केतु चौथे भाव में हो तो आपके अपनी माँ ,भूमि ,वाहन से सम्बंधित कार्य अधूरे रहते है 

 यदि केतु पांचवे भाव में हो तो शिक्षा ,संतान से सम्बंधित कार्य अधूरे होते है 

 यदि केतु छठे भाव में हो तो रोग, ऋण और शत्रु से सम्बंधित मतलब रोग ,ऋण और शत्रु से आपको सबसे ज्यादा भय लगेगा 
 यदि केतु सप्तम में हो तो अपनी पत्नी से सम्बंधित कार्य अधूरे होंगे मतलब इस जन्म में आपको अपनी पत्नी पर बहुत ध्यान देना होगा , 

यदि केतु आठवे भाव में हो अनुसन्धान,ससुराल ,तंत्र, से सम्बंधित कार्य अधूरे होंगे

 यदि केतु नवम में हो तो पिता ,धर्म से सम्बंधित कर्म अधूरे होंगे 


 यदि केतु दशम में हो तो ऐसे लोग कुछ अलग करना चाहते है और करियर में बहुत बदलाव होते है और अपने कर्मो के प्रति भय बना रहता है 

 यदि केतु ग्यारहवे में हो तो अपनी आय से ,बड़े भाई बहनो ,बहु के प्रति दामाद के प्रति कार्य अधूरे होंगे
 
 यदि केतु बारहवे में हो तो आपके भोग और मोक्ष से सम्बंधित कर्म अधूरे रह सकते है 

 यहाँ पर हमने कुंडली में केतु की सारी स्थितियों के बारे में चर्चा की है आप भी अपनी कुंडली खोले और देखे की आपकी कुंडली में केतु किस भाव में बैठा हुआ है फिर मेरे इस लेख को पढ़े और देखे की आपके भी कौन से कर्म अधूरे है क्या आप भी वही कर्मो को पूरा कर रहे है 
इस  लेख से सम्बंधित  जिज्ञासा के लिए टिप्पणी  करे 


कुंडली के भावों को समझने के लिए आप हमारा दूसरा लेख भी पढ़ सकते है 

 पूरा लेख पढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद्

Sunday, 18 September 2022

how to use LO shu Grid ,Lo shu grid (चीन में प्रचलित एक ज्योतिषीय विधि)


Lo shu grid (चीन में प्रचलित एक ज्योतिषीय विधि)  

नमस्कार मित्रों , 
आज के लेख में मैं ज्योतिष के सम्बन्ध में एक बहुत रोचक विधि साझा करने जा रहा हूँ आशा करता हूँ की आप सबको बहुत पसंद आएगी, Lo shu grid लोशु ग्रिड - यह चीन में प्रचलित एक ज्योतिष प्रिडिक्शन विधि है जिसमे केवल आप के जन्म तिथितिथि की जरूरत पड़ती है यह ३*३ वर्ग पर आधारित प्रिडिक्शन विधि है जिसमे अंकों का स्थान नहीं बदला जाता उसे कैसे भी जोड़ो योगफल १५ आता है इसमें केवल ये देखा जाता है की आपकी जन्म तिथि के अनुसार कौन सा अंक उपस्थित है, अनुपस्थित या उसकी कितनी बार पुनरावृत्ति हुयी है उसी के आधार पर व्यक्ति का भविष्यफल किया जाता है अब मैं आपको उद्धहरण सहित समझाता हूँ की कैसे इस विधि का उपयोग करना है नीचे दिया गया चित्र लो शु ग्रिड का है अपनी जन्म तिथि के अनुसार इस ग्रिड को भरना है
उदाहरण :जन्म तिथि 01 -01 -1985 सबसे पहले हमें मूलांक निकालना होगा जो की 0 +1 =1 फिर भाग्यांक जो की 0 +1 +0 +1 +1 +9 +8 +5 =25 =२+५ =7 जन्मतिथि में उपस्थित अंक - 1 ,1 ,1 ,9 ,8 ,5  ,1 ,7 शून्य को नहीं शामिल करना है जन्म तिथि में अनुपस्थित अंक २,३,४,६ अब इन अंको को ऊपर दिए लोशु ग्रिड में भरना है  ग्रिड में अंक भरने के बाद का चित्र नीचे दिया गया है 

इस ग्रिड के अनुसार व्यक्ति को धन सम्पति ,विवाह ,स्वास्थ्य ,मित्रों आदि  के सम्बन्ध में कुछ कमी हो सकती है

 क्यूंकि व्यक्ति के जन्म तिथि में २,३,४,६  अंक अनुपस्थित है 

सनद रहे यह बहुत ही बेसिक जानकारी है केवल जिज्ञासा पूरी करने के लिए कम्पलीट एनालिसिस के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पंहुचा जा सकता है 

वैसे तो लो शु ग्रिड बहुत बड़ा टॉपिक है फिर भी मैंने उसका एक बेसिक रूप मैंने यहाँ प्रस्तुत किया है 

आशा करता हूँ की आप सभी को समझ में आ गया होगा आप सभी इस विधि को अपनी जन्म तिथि पर आजमा कर देखिये 

धन्यवाद 






Saturday, 16 July 2022

How to know mental disorder in palm हस्त रेखा और मानसिक रोग



नमस्कार मित्रो,
बहुत दिनों बाद मैं अपना नया लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ आशा करता हूँ की पिछले लेखो की भांति इस लेख से भी आप सब बहुत लाभान्वित होंगे 
 जैसे जैसे भौतिकता बढ़ती जा रही है वैसे वैसे हमारा जीवन तो आसान होता जा रहा किंतु उसके साथ साथ समस्याएं भी बढ़ती जा रही है जिसका प्रभाव सीधा हमारे मानसिक स्वाथ्य पर पड़ रहा है जिसके फलसवरूप तनाव, ड्रिप्रेशन ,क्रोध ,चिडचिड़पन ,बैचनी ,अवसाद आदि हो रहे है यदि समय रहते इन्हे नहीं पहचाना गया तो धीरे धीरे ये हमारे मष्तिस्क की सोचने समझने की क्षमता तो प्रभावित  कर देते है और इंसान को एक लूप में फंसा देते है जिससे निकलना आसान नहीं होता क्यूंकि ये सब हमारे मस्तिष्क के द्वारा बनाया गया मायाजाल होता है
अब बात करते है की हथेली में ऐसी कौन की रेखाएं और चिन्ह होते है जो ये इशारा करती है की आपको मानसिक परेशानी हो सकती है 
  1. यदि मस्तिष्क रेखा बहुत झुकी हुयी हो और चंद्र पर्वत जा रही हो ऐसे लोग बहुत संवेदनशील और कल्पनाशील होते है 
  2. यदि मस्तिष्क  रेखा शनि पर्वत के नीचे कटी फटी या टूटी फूटी हो ऐसे लोग अक्सर दुखी और अवसाद में  है 
  3. यदि जीवन रेखा के अंदर से रेखाएं मस्तिष्क रेखा तो काट रही हो 
  4. यदि मस्तिष्क रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो 
  5. यदि मस्तिष्क रेखा से कई शाखाये मंगल पर्वत पर जा रही  हो और इन रेखा पर लाल बिंदु हो तो व्यक्ति अनिंद्रा का भी शिकार होता है 
  6. यदि शनि  पर्वत पर जाली या  ग्रिल जैसे चिन्ह हो
  7. यदि शनि पर्वत पर वृत्त का  चिन्ह हो 
     ये सब चिन्ह होने पर व्यक्ति लगातार मानसिक परेशानियों,विकारो   से जूझता   रहता है 
उपाए :
१. एक स्वथ्य दिनचर्या 
२. रोजाना व्यायाम 
३.योग 
४ प्राणायम 



 


 

Saturday, 29 February 2020

Mantra for enhancing self confidence(आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मंत्र )

आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मंत्र -


नमस्कार मित्रों ,आज के लेख  में हम बात करेंगे मंत्र जाप से हम कैसे अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते है इस सन्दर्भ में बहुत सारे वैदिक मंत्र उपलध है सबसे पहले हम समझेंगे की मंत्र कब असर करते है मंत्र तभी काम करेगा जब आपके पास ज्ञान होगा बिना ज्ञान के मंत्र आपके अंदर आत्मविश्वास नहीं भर सकता मंत्र उन लोगो पर काम करेंगे जिन्हे ज्ञान तो बहुत है पर उसे प्रदर्शित करने में उन्हें डर लगता है या यूँ कह सकते है की कोई भी नया काम करने से डरते है केवल मंत्र जाप से ही  आत्मविश्वास नहीं बढ़ सकता उसके लिए आपको  समय के साथ साथ अपनी योग्यता भी बढ़ानी होगी ,योग्यता के साथ मंत्र जाप आपके आत्मविश्वास में चार चाँद लगा देगा 
अब जानते है की वो मंत्र क्या है -
आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मंत्र


 मंत्र है                        " ॐ हनुमते नम: | "

                           "OM HANUMATE NAMAH"

प्रयोग विधि :
 सबसे पहले आपको अपने मन में अपना उद्देश्य निर्धारित करना है की आप किस लिए इस मंत्र का जाप कर रहे है कितने दिनों तक करेंगे ये भी निर्धारित करना है 
फिर जब आप इस मंत्र को करें तब आप को कल्पना करनी है की हनुमान जी का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो रहा है और और आपका अभीष्ट उद्देश्य सफल हो रहा है 

Wednesday, 26 February 2020

cross on jupiter mount(गुरु पर्वत पर क्रॉस का निशान )

नमस्कार पाठको ,

आज का हमारा विषय है - हथेली में गुरु पर्वत पर क्रॉस चिन्ह का क्या महत्व है


समान्यता क्रॉस का चिन्ह हथेली पर अच्छा नहीं माना जाता परन्तु गुरु पर्वत पर (इंडेक्स फिंगर के नीचे )
ये चिन्ह एक अच्छे वैवाहिक  जीवन का संकेत देती है गुरु पर्वत पर काफी बड़ा क्रॉस का चिन्ह दूसरों पर हावी होने की प्रकृति का संकेत देता है कभी कभी ये चिन्ह प्रेम विवाह का भी संकेत देता है यदि 

Sunday, 28 July 2019

8 sign in the palm for good life अच्छी हथेली पर पायी जाने वाली रेखाएं और चिन्ह

नमस्कार पाठको आज हम इस लेख में चर्चा करेंगे की एक अच्छी हथेली में कैसी रेखाएं पायी जाती है ऐसी रेखाएं जिन लोगो में पायी जाती है निश्चित तौर पर वे एक अच्छा जीवन जीते है |

१ अगर जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा भी हो तो ये बहुत अच्छा मन जाता है ऐसी रेखा व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ और लम्बी आयु प्रदान करती है
२ गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह व्यक्ति को समृद्धि प्रदान करता है
३. सूर्य रेखा पर कोई भी क्रॉस नहीं होना चाहिए
३. भाग्य रेखा लम्बी और निर्दोष होनी चाहिए
४. हृदय रेखा के अंत और शुरुआत में शाखाये होनी चाहिए
५ अंगूठे में यव का चिन्ह होना चाहिए
६  मस्तिष्क  रेखा सीधी और लम्बी  होनी चाहिए तथा  अंत में उसके  शाखा होनी चाहिए
७ मछली का चिन्ह सुख और समृद्धि के लिए अच्छा मन जाता है
८ स्पष्ट मणिबंद रेखा होनी चाहिए

हथेली में और भी बहुत शुभ चिन्ह होते है पर इस लेख में हमने केवल कुछ सामान्य चिन्हों और रेखाओं के बारे में चर्चा की है ये भी जरूरी नहीं है की हथेली में ये सभी चिन्ह एक साथ पाए जाये

Friday, 31 May 2019

विज्ञान भैरव तंत्र ,meditation technique

नमस्कार पाठको आज हम इस लेख में बात करेंगे विज्ञानं  भैरव तंत्र ग्रन्थ  के बारे में ,  विज्ञान भैरव तंत्र कश्मीरी शैव सम्प्रदाय के त्रिक उपसम्प्रदाय का मुख्य ग्रन्थ है इस ग्रन्थ में ध्यान लगाने की विधियों का वर्णन है कुल ११२ विधिया है जो इस ग्रन्थ में  भगवान शिव ने माँ शक्ति को बताई है इस ग्रन्थ में माँ शक्ति भगवान् शिव से बहुत से प्रश्न पूछती है जैसे की हे प्रभु आपका का सत्य क्या है ?जीवन की धुरी क्या है ?ये आपका आश्चर्य भरा जगत क्या है और इसके उत्तर में भगवन शिव कहते है हे देवी मैं केवल आपको कुछ ध्यान की विधिया दे सकता हूँ जिनका उपयोग करके आप सारे प्रश्नो का उत्तर प्राप्त कर लेंगी






भगवान् शिव द्वारा बताई गयी ११२ ध्यान विधिया मानव जीवन के लिए भी बहुत उपयोगी है जिनका अभ्यास करके मानव भी ज्ञान को प्राप्त कर सकता है  ध्यान के लिए ये सारी विधियां नहीं अपनानी है कोई भी व्यक्ति ११२ विधियों में किसी  भी एक विधि का अभ्यास कर सकता है. हर विधि अपने आप में पूर्ण है इस लेख में मैं पहली विधि के बारे में बताने जा रहा हूँ

विधि -०१
भगवान् शिव  कहते है
हे देवी यह अनुभव दो  श्वासो के बीच घटित हो सकता है
श्वास के भीतर आने के पश्चात और बहार लौटने के ठीक पूर्व 

व्याख्या-

वैसे तो श्वास लेने की क्रिया दो भागो में विभाजित है एक श्वास का भीतर जाना और दूसरा श्वास का बहार आना पर अगर बहुत ध्यान से देखा जाये तो श्वास की क्रिया तीन भागो में विभाजित होती है एक श्वास का भीतर आना और कुछ क्षण के ठहर जाना और फिर बहार निकलना
श्वास के भीतर या बहार मुड़ने के पहले एक क्षण है जब हम श्वास नहीं लेते उसी क्षण यह अनुभव घटित हो सकता है हमको केवल अपनी श्वास का निरीक्षण करना है की श्वास किस तरह भीतर जाती और बहार निकलती कुछ अभ्यास के बाद हम जरूर उस बिंदु को प्राप्त कर सकते जहा श्वास ठहर जाती और उस क्षण को प्राप्त करने के बाद कोई भी प्रश्न अनुत्तरित नहीं रह जायेगा 

Saturday, 13 April 2019

हाथ मिलाने के तरीके से जाने दूसरे का व्यक्तित्व

नमस्कार पाठको,
 आज हम बात करेंगे की किस प्रकार हम हाथ मिलाने के तरीके से सामने वाले के  व्यक्तित्व को  जान सकते हैं वैसे तो केवल हाथ मिलाने से किसी के व्यक्तित्व के बारे में सब कुछ नहीं जाना  जा सकता है और जरूरी नहीं है की नीचे दिए गयी थ्योरी सभी व्यक्तियों पर सटीक बैठे किन्तु इस थ्योरी से आप दूसरे के व्यक्तित्व के बारे में एक अनुमान लगा सकते है

१. ढीला एवं लापरवाही से हाथ मिलाने वाला व्यक्ति
ऐसे व्यक्ति स्वार्थी ,चालक  या दूसरे में रूचि न लेने वाले हो सकते है स्वयं को ज्यादा होशियार समझते है और शंकालु प्रवत्ति के हो सकते है ऐसे व्यक्तियों में सुपीरियटी काम्प्लेक्स ज्यादा पाया जाता है जिद्दी एवं तानाशाही प्रवत्ति का हो सकता है 

२.कसकर हाथ मिलाने वाला व्यक्ति - 
ऐसे व्यक्ति दूसरे को बराबरी का दर्जा देते है दूसरों को सम्मान देते है और भरोसेमंद होते हैं
३. हाथ मिलकर लगातार हाथ हिलने वाला व्यक्ति - 
ऐसे व्यक्ति लापरवाह होते है किन्तु दिल के बहुत साफ होते है ऐसे व्यक्ति को आसानी से मुर्ख बनाया जा सकता बहुत संवेदनशील होते है संसार में क्या हो रहा है ,इसकी उनको चिंता ही नहीं रहती है

. सैंडविच तरीके से हाथ मिलाने वाला व्यक्ति -
ऐसे व्यक्ति अवसरवादी होते है लोगे से बात करके अपना काम निकलाने में वो माहिर होते है व्यापर करने में ऐसे व्यक्ति बहुत सफल होते है दूसरोको अपनी बातों से आकर्षित कर लेते है

५ एक हाथ मिलाते हुए  दूसरा हाथ सामने  वाले के हाथ  पर किसी जगह रखने वाला व्यक्ति -
ऐसा व्यक्ति बहुत अच्छे स्वभाव वाला होता है यह सामने वाले का हितैषी होता है सामने वाले का शुभ चिंतक होता है सामने वाले की यथशक्ति मदद करने वाला होता है
नीचे से खुली हथेली से हाथ मिलाने वाला व्यक्ति - बहुत जल्दी विचलित होते है सहज स्वभाव के होते हैं हीनभावना से ग्रस्त हो सकता है दूसरों की बातों में आसानी से आ जाते हैं

Wednesday, 5 September 2018

६ सितम्बर 2018 से शनि होंगे मार्गी लाएंगे नयी सौगाते




आज हम इस लेख में बात करेंगे शनि देव के मार्गी होने परहमारे ऊपर क्या प्रभाव  पड़ेंगे  सबसे पहले ये समझना जरूरी है की मार्गी  और वक्री से क्या अभिप्राय है अगर कोई अपने मार्ग पर सीधा चलता है तो उसे मार्गी कहेंगे और उल्टा चलता है तो उसे वक्री कहेंगे पर यहाँ ये समझ लेना जरूरी है की कोई ग्रह उल्टा नहीं चलता पर कभी कभी कुछ समय के लिए  पृथ्वी से देखने पर सापेक्ष वेग के कारण वो पृथ्वी से उल्टी  दिशा में प्रतीत होता दिखाई देता है १८ अप्रैल २०१८ से शनि देव वक्री हो गए थे जो की अब ६ सितम्बर २०१८ से मार्गी हो जायेंगे ज्योतिष में शनि बहुत  धीरे धीरे चलने वाले माने गए है वक्री होने पर ये और भी धीरे हो जाते है और बहुत सी चीजों की प्रगति को धीमा कर देते है पर अब ६ सितम्बर  से शनि देव मार्गी हो जायेंगे जिस से की आम लोगे के रुके हुए काम बनना शुरू हो जायेंगे सरकारी योजनाए ,नौकरियों की कमी दूर होंगी  बहुत सारी नयी योजनाए लागू होंगी विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी आएगी अब १२ राशियों पर शनि के मार्गी होने के प्रभाव पर चर्चा करते है
मेष राशि - भाग्य में वृद्धि होगी कम मेहनत  में ज्यादा फायदा होगा 
वृष राशि - निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी जिस से की आपके रुके कार्य बनेंगे 
मिथुन राशि -शनि से सम्बंधित व्यवसाय लाभ देंगे,शादी में रुकावट दूर होंगी , धन लाभ हो सकता है 
कर्क राशि -रोग ऋण और शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकते है 
सिंह राशि -शिक्षा में वृद्धि ,पिता से मतभेद  कम होंगे ,प्रसिद्धि मिल सकती है 
कन्या राशि -भौतिक सुखो में वृद्धि ,पिता को कष्ट हो सकता है यात्राए सफल होंगी 
तुला राशि- संतान सुख में वृद्धि ,पारिवारिक सुखो में वृद्धि 
वृश्चिक राशि -रुका हुआ धन शत्रु विजय हो सकती है. 
 धनु राशि -मान सम्मान में वृद्धि ,आत्मविश्वास में वृद्धि होगी 
मकर राशि -रुके हुए कार्य बनेगे,निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी
कुम्भ राशि -नयी योजनाओं के रास्ते खुलेंगे, यात्राऐ होंगी ,
मीन राशि -रुके हुए कार्य बनेगे ,दूसरों के मामले में  दखल न दे 
इस लेख में हमने सभी राशियों पर शनि के मार्गी होने के सामान्य प्रभावों की चर्चा की है 






Tuesday, 3 July 2018

हथेली में व्यापार करने के संकेत




आज हम इस लेख में बात करेंगे की ऐसे कौन  से संकेत होते है हथेली में जिस से की ये पता चले की व्यक्ति के अंदर व्यापार करने के गुण  है की नहीं। सबसे पहले हमे ये समझना चाहिए की एक व्यापारी बन ने के लिए बुनियादी  क्या क्या गुण होने चाहिए
जोखिम लेने की क्षमता ,मानसिक मजबूती ,चतुराई ,न ज्यादा आदर्शवादी न ज्यादा स्वार्थी , स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता ये सब कुछ बुनियादी गुण है जिन्हे हम हथेली के माध्यम से चर्चा करेंगे
१. हथेली में मस्तिष्क रेखा बहुत झुकी हुयी नहीं होनी चाहिए अगर मस्तिष्क रेखा बुध पर्वत की ओर जा रही  या उस से निकल कर कोई शाखा बुध पर्वत की ओर जा रही हो तो यह अच्छा गुण माना जाता है व्यापर करने के लिए
२. ह्रदय रेखा शनि और गुरु पर्वत के बीच से निकालनी चाहिए क्यों की ऐसी स्थिति में व्यक्ति न ज्यादा आदर्शवादी होता है और न ही ज्यादा स्वार्थी
३. अनामिका ऊँगली ज्यादा छोटी नहीं होनी चाहिए क्यों ज्यादा छोटी अनामिका उंगली जोखिम लेने की क्षमता को कम  करती है
४. कनिष्ठा ऊँगली भी ज्यादा छोटी नहीं होनी चाहिए बुध पर्वत या बुध की उंगली पर शुभ निशान जैसे त्रिकोण ,चतुर्भुज ,मतस्य का चिन्ह होना अच्छा माना जाता है
५ कनिष्ठा ऊँगली अनामिका ऊँगली से दूर होनी चाहिए
६ अंगूठे का पहला पोर बड़ा होना चाहिए जो की इच्छा शक्ति को दर्शाता है
७ उँगलियों का दूसरा पोर बड़ा होना चाहिए
८ बुध रेखा मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा द्वारा मिलकर बना  त्रिकोण अच्छा संकेत है अच्छा व्यापारी बन ने के लिए
* उंगलियों के पोरो के बारे में अधिक पढ़ने के लिए
http://ashishastrologer.blogspot.com/2013/07/significance-of-phalanges-in-finger.html

Friday, 29 June 2018

एक साथ न पहने जाने वाले रत्न(odd combinations of Gemstones )




आज हम इस लेख में बात करेंगे एक साथ न पहने जाने वाले रत्नो के बारे में कभी कभी हम अज्ञात वश ऐसे दो रत्न पहन लेते है जो  नहीं पहने जा सकते जिस से की हमे फायदा होने की बजाये नुकसान होने लगता है 
जैसे 
१- मंगल ग्रह का रत्न मूंगा और बुध ग्रह का पन्ना  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए  है 
२ -चंद्र ग्रह का मोती और शनि ग्रह का नीलम  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए  है 
३ -चंद्र ग्रह का मोती और बुध ग्रह का पन्ना  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
४-सूर्य का माणिक्य और शनि का नीलम  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
५-सूर्य का माणिक्य और शुक्र का हीरा  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
६- मंगल ग्रह का मूंगा और शनि ग्रह का नीलम एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
७- शुक्र ग्रह  का हीरा और गुरु का पुखराज  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
८-गुरु ग्रह का पुखराज और शनि का नीलम  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
९ -चंद्र ग्रह का मोती और राहु का गोमेद एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
१० मंगल ग्रह का मूंगा और राहु का गोमेद एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 

Thursday, 21 December 2017

what is Gund Mool Nakshtra and its worship गण्ड मूल नक्षत्र एवं पूजन

आज हम इस लेख में गण्ड मूल नक्षत्र के बारे में बताने जा रहे है गण्ड मूल नक्षत्र के बारे में तरह तरह की भ्रांतिया फैली हुयी है मेरे इस लेख का उद्देश्य उन भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश करना है
ज्योतिष में १२ राशि और २७ नक्षत्र है और प्रत्येक नक्षत्र के ४  चरण होते है ज्योतिष में एक राशि का विस्तार  ३० डिग्री है जबकि प्रत्येक नक्षत्र का विस्तार १३ डिग्री २० अंश होता है जब कोई राशि और नक्षत्र एक स्थान पर समाप्त होते है तब उस स्थिति को गण्ड नक्षत्र और जब इसी स्थान से नया नक्षत्र शुरू होता है तब इस स्थिति को  मूल कहते है २७ नक्षत्रो में ६ नक्षत्र ही गण्ड मूल नक्षत्र कहलाये जाते है जिनमे ३ गण्ड और ३ मूल नक्षत्र कहे जाते है वो इस प्रकार है  
१.अश्वनी  (केतु स्वामी ) इस नक्षत्र के पहले चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है 
२.अश्लेषा  (बुध) इस नक्षत्र के  चौथा चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है 

३ मघा ,(केतु )इस नक्षत्र के  पहला  चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
४ मूल ,(केतु)इस नक्षत्र के  पहला चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
५. ज्येष्ठा ,(बुध)इस नक्षत्र के  चौथा चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
६ रेवती (बुध)इस नक्षत्र के  चौथा चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
गण्ड मूल नक्षत्र के  प्रभावों के बारे में बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है ज्योतिष में परम्परागत ज्योतिषचार्यों ने अपने अनुभवों के अनुसार इन नक्षत्रो के प्रभावों का विवेचन किया है गण्ड  मूल नक्षत्र को शांत करने पूजा विधि है यदि कोई पूजा नहीं करवा पाता है तो उसे कम से काम अपने नक्षत्र के स्वामी ग्रह की पूजा अवश्य करनी चाहिए पूजा करवाने के लिए विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए



Sunday, 19 November 2017

हथेली के चिन्हो से जानिये धन योग

इस लेख में हम कुछ ऐसे चिन्हो के बारे में बताएँगे जिस से आप जान सकेंगे की क्या आपके भाग्य में धन योग है 
हथेली के चिन्हो से जानिये धन योग
1.   हथेली में गुरु पर्वत पर स्टार चिन्ह होना बहुत ही शुभ संकेत देता है धन, सम्पति और यश  संबध में 
२.  हथेली में सूर्य पर्वत पर स्टार  चिन्ह होना भी बहुत शुभदायक माना जाता धन सम्पति और यश के सम्बन्ध में 
3. यदि कोई रेखा जीवन रेखा से निकल कर गुरु पर्वत पर जाती है ऐसी रेखाओ को उन्नति की रेखा कहा जाता और जिसके हथेली में ऐसी  रेखाएं होती ऐसा व्यक्ति लगातार उन्नति करता रहता है 
4 .जीवन रेखा के अंदर बने त्रिभुज के  चिन्ह भी धन के योग का संकेत देते है 
5 . शनि की तरफ जाती हुयी जीवन रेखा से छोटी छोटी रेखाएं भी उन्नति का संकेत देती है पर इन उन्नतियों को पाने के लिए व्यक्ति को कठिन परिश्रम करना पड़ता है 
6.  सूर्य रेखा पर स्टार का चिन्ह जीवन में बहुत यश का प्रतीक होता है 
7 .बुध पर्वत पर एक खड़ी रेखा भी धन योग का प्रतीक होती है 

**ये चिन्ह केवल संकेतक है सही दिशा और कठिन परिश्रम से किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है 






Sunday, 1 October 2017

हथेली के चिन्हो से जानिये अपना व्यसाय

इस लेख में हम कुछ ऐसे चिन्हो के बारे में बताएँगे जिनसे आप ये जान सकेंगे की आप को किस व्ययसाय में सफलता मिल सकती है

१. बुध पर्वत पर यदि २ या तीन खड़ी रेखाएं हो तो चिकित्सा में या चिकित्सक के व्यवसाय में सफलता मिल सकती है 
२ चंद्र पर्वत पर जाली झुकी मतिष्क रेखा छोटा अंगूठा काव्य  क्षेत्र में सफलता मिल सकती है 
3 मणिबंद से यदि कोई रेखा गुरु पर्वत पर जाये तो वकालत या कानूनी क्षेत्र में सफलता मिल सकती है 
4 यदि मतिष्क रेखा बुध पर्वत की तरफ जाये तो किसी की भी नक़ल उतरने की क्षमता होती है 
5  यदि  सूर्य पर्वत पर कई रेखाएं हो और एक दूसरे को कर रही हो तो एकाग्रगता की कमी की वजह से असफलता मिलती है 
6 . यदि भाग्य रेखा से कोई शाखा बुध पर्वत तक जाये और दोषरहित मतिष्क रेखा ,लम्बी बुध की ऊँगली हो तो व्यापर में सफलता की सूचक है 

**इस लेख में हमने कुछ व्यवसाय के बारे में बताया है आगे के लेख में कुछ और व्यवसाय और और उनसे संबंधित चिन्हो के बारे में बताएँगे 
*और ऐसा भी नहीं है की यदि ये चिन्ह आपकी हथेली में नहीं होंगे तो आप उस क्षेत्र में सफलता नहीं प्राप्त कर सकते है ये चिन्ह केवल संकेतक है और कठिन परिश्रम से किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है 

Friday, 21 July 2017

7 sign of Good husband in palmistry

palm of good husband,fate line,marriage line,yuv,fish sign,cross on jupiter,fork head line

Palm of Good husband contains some good sign which are given below:

1. There should be faultless marriage line ,upper marriage line should be greater than lower marriage line.
2. There should be Yuv sign in first and second joint of thumb.
3.There should be good fate line
4.There should be cross on the mount of Jupiter as shown in above picture.
5 There should be good sun line
6.There should be forked heart line at the end
7.There should be faultless head line.
8 There should be fish sign as shown in picture.


Wednesday, 19 July 2017

6 sign in the Palm of Good Wife




palm of good wife,fate line,yuv sign,fish sign,head line,fork heart line,life line, mars line

Palm of good wife contains some good sign which are give below:

1. there should be a fish sign as shown in above picture .

2.heart line should be faultless and  fork at the end 

3.life line should be faultless.

4.there should be a mars line as shown in above picture. 

5. there should be a "yuv" sign at the first joint of thumb and second joint of thumb .

6. head line should be faultless 








Wednesday, 12 July 2017

Significance of Thumb in palm (हथेली में अंगूठे का महत्व)

                               


significance of thumb,


हस्त रेखा विज्ञान में अंगूठे का अत्यधिक महत्व है अंगूठा व्यक्ति की स्वाभाविक इच्छा शक्ति को दर्शाता है सामान्यता अंगूठा प्रेम, तर्क और इच्छा शक्ति को दर्शाता है अंगूठे के पहले पर्व से प्रेम दूसरे से तर्क और तीसरे पर्व से इच्छा शक्ति का पता लगाया जा सकता  है जो पर्व अंगूठे का जितना बड़ा होगा उस से सम्बंधित गुण  भी उतने होंगे जैसे तीसरा पर्व बाकी दो पर्वो से बड़ा है तो उस व्यक्ति में इच्छा शक्ति की प्रबलता होगी
कठोर या न झुकने वाला अंगूठा :  इस प्रकार वाले व्यक्ति ईमानदार मेहनती और अत्यधिक इच्छा शक्ति वाले होते है और अंत  में बहुत सफल बनते है ऐसे व्यक्ति खुल कर विरोध करने वाले होते है और उनका भी विरोध होता है यदि ऐसा अंगूठा मोटा और छोटा है तो ऐसे व्यक्ति में दुर्गुण अधिक आ जाते है \

झुकने वाला अंगूठा :ऐसे व्यक्ति बहुत भावुक होते है सभी से प्रेम करने वाले होते है ऐसे व्यक्ति कोई बात छिपकर नहीं रख पाते है मष्तिस्क रेखा अच्छी होने पर ये बहुत सहनशील होते है जल्दी ही दूसरों के प्रभाव में आ जाते है ऐसे व्यक्ति बहुत ही स्पष्टवादी और सहनशील होते है और सामान्यता हर वातावरण में अपने आप को ढाल लेते है ऐसे अंगूठे वाले व्यक्ति की मस्तिष्क रेखा मंगल पर्वत तक जाती है तो वे कठोर होते है जबकि मस्तिष्क रेखा चंद्र पर्वत पर जाती है तो वे अत्यंक भावुक और एकांतप्रिय होते है

Tuesday, 21 February 2017

Significance of mount of Jupiter in Palm

Significance of mount of Jupiter in Palm
mount of jupiter,cross sign triangle sign ,square sign. till,mole


Mounts in the palm are found at the base of fingers ,thumb.When mounts in the palm are raised(not too much) then it is said to be strong when flat it is said to be ordinary and when it is depressed it is said to be bad . Mount of Jupiter is found at the base of first finger.It represents  fame ,  leadership  , honour ,dignity , religious nature.

Raised or developed mount of Jupiter represents higher post,good business man,it gives good hearing power ,early baldness . overdeveloped mount of Jupiter makes person arrogant while 

depressed mount of Jupiter  will give  person idleness, egoism. 

triangle sign on this mount represents big government officer .
rectangle sign on this mount saves person from danger.

small line between heart and head line on this mount shows acquisition of money  

 Star sign along with good head line on the mount of Jupiter gives great honour.

Cross sign along with good head line on the mount of Jupiter represent lucky and happy marriage and help from in -laws

Grill sign on the mount of Jupiter makes person proudy .

mole on the mount of Jupiter represent fame


Thursday, 15 December 2016

Know your name number,root number and lucky number(आपका नामांक ,मूलांक और भाग्यांक )

                                                 आपका नामांक ,मूलांक और भाग्यांक 






भाग्यांक और नामांक अथवा नामांक और मूलांक परस्पर  शत्रु होने पर भाग्योदय में अवरोध उत्पन्न करते है इसलिए अपने नाम में सामान्य परिवर्तन करके आप अपने नामांक मूलांक और भाग्यांक में परस्पर सामंजस्य बैठा सकते है और  भाग्योदय में आने वाले अवरोधों  को दूर कर सकते है. 
अब हम समझेंगे की नामांक की गणना कैसे की जाती है 

A ,I,J,Q,Y                                    1
B,K,R                                          2
C,G,L,S                                       3
D,M,T                                         4
E,H,N.X                                      5
U,V,W                                         6
O,Z                                              7
F,P                                               8


9  को किसी  भी वर्णाक्षर का स्वामित्व नहीं मिला है।  ऊपर दी गयी सारणी के आधार पर हम नामांक की गणना करेंगे 
 उदाहरण : 
U M E S H                                J   E  T  H W A N  I
6+4+5+3+5               +              1+5+4+5+6+1+5+1  =51=5+1=6

नामांक हुआ =6


अब मूलांक और भाग्यांक की गणना करेंगे 
उमेश जेठवानी की जन्म तारीख है 
01-01-1985

मूलांक =0+1=1


भाग्यांक 
01/01/1985
0+1+0+1+1+9+8+5=7


उमेश जेठवानी का नामांक हुआ ६ ,मूलांक हुआ १ और भाग्यांक  हुआ ७ 
उमेश जेठवानी का नामांक मूलांक से शत्रुत्र्ता रखता है जबकि नामांक भाग्यांक से सम है 
इसलिए उमेश जेठवानी अपने नामांक में परिवर्तन करके जीवन में और उन्नतियों की तरफ अग्रसित हो सकते है. 


Thursday, 3 November 2016

अपने नाम के प्रथम अक्षर से जानिए अपनी राशि

अपने नाम के प्रथम अक्षर से  जानिए अपनी  राशि
नीचे दी गयी सारणी  उनके लिए है जो अपने नाम से अपनी राशि  जानना  चाहते है।

  • मेष -                                  चू ,चे ,चो ,ला ,ली,लू ,ले, लो, अ
  • वृष -                                   ई ,उ ,ऐ, ओ ,ब ,बी ,वू ,वे, वी 
  • मिथुन -                               क, की ,कू ,घ, ड़ ,छ, के, को ,ह  
  • कर्क -                                   ही, हू, हे, हो ,डा ,डी, डू, डे, डो 
  • सिंह -                                   म ,मी ,मू ,में, मो, टा ,टी ,टू ,टे 
  • कन्या -                                टो, प,  पी, पू, श, ठ, पे, पो 
  • तुला -                                  र, री, रू ,रो ,त ,ती, तु, ते 
  • वृश्चिक -                               तो  ,न, नी ,ने ,नू ,नो , य, यी ,यू 
  • धनु -                                    ये, यो ,भ, भी, भू, ध, फ, ढ, भे 
  • मकर                                   भो, ज, जी ,खी ,खू ,खे ,खो, ग, गी 
  • कुम्भ -                                गु ,गे ,गो ,स, सी ,सु ,से, सो, द 
  • मीन-                                   दी ,दू, थ, दे, दो ,चा, ची