Saturday, 29 February 2020

Mantra for enhancing self confidence(आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मंत्र )

आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मंत्र -


नमस्कार मित्रों ,आज के लेख  में हम बात करेंगे मंत्र जाप से हम कैसे अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते है इस सन्दर्भ में बहुत सारे वैदिक मंत्र उपलध है सबसे पहले हम समझेंगे की मंत्र कब असर करते है मंत्र तभी काम करेगा जब आपके पास ज्ञान होगा बिना ज्ञान के मंत्र आपके अंदर आत्मविश्वास नहीं भर सकता मंत्र उन लोगो पर काम करेंगे जिन्हे ज्ञान तो बहुत है पर उसे प्रदर्शित करने में उन्हें डर लगता है या यूँ कह सकते है की कोई भी नया काम करने से डरते है केवल मंत्र जाप से ही  आत्मविश्वास नहीं बढ़ सकता उसके लिए आपको  समय के साथ साथ अपनी योग्यता भी बढ़ानी होगी ,योग्यता के साथ मंत्र जाप आपके आत्मविश्वास में चार चाँद लगा देगा 
अब जानते है की वो मंत्र क्या है -
आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मंत्र


 मंत्र है                        " ॐ हनुमते नम: | "

                           "OM HANUMATE NAMAH"

प्रयोग विधि :
 सबसे पहले आपको अपने मन में अपना उद्देश्य निर्धारित करना है की आप किस लिए इस मंत्र का जाप कर रहे है कितने दिनों तक करेंगे ये भी निर्धारित करना है 
फिर जब आप इस मंत्र को करें तब आप को कल्पना करनी है की हनुमान जी का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो रहा है और और आपका अभीष्ट उद्देश्य सफल हो रहा है 

Wednesday, 26 February 2020

cross on jupiter mount(गुरु पर्वत पर क्रॉस का निशान )

नमस्कार पाठको ,

आज का हमारा विषय है - हथेली में गुरु पर्वत पर क्रॉस चिन्ह का क्या महत्व है


समान्यता क्रॉस का चिन्ह हथेली पर अच्छा नहीं माना जाता परन्तु गुरु पर्वत पर (इंडेक्स फिंगर के नीचे )
ये चिन्ह एक अच्छे वैवाहिक  जीवन का संकेत देती है गुरु पर्वत पर काफी बड़ा क्रॉस का चिन्ह दूसरों पर हावी होने की प्रकृति का संकेत देता है कभी कभी ये चिन्ह प्रेम विवाह का भी संकेत देता है यदि 

Sunday, 28 July 2019

अच्छी हथेली पर पायी जाने वाली रेखाएं और चिन्ह

नमस्कार पाठको आज हम इस लेख में चर्चा करेंगे की एक अच्छी हथेली में कैसी रेखाएं पायी जाती है ऐसी रेखाएं जिन लोगो में पायी जाती है निश्चित तौर पर वे एक अच्छा जीवन जीते है |

१ अगर जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा भी हो तो ये बहुत अच्छा मन जाता है ऐसी रेखा व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ और लम्बी आयु प्रदान करती है
२ गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह व्यक्ति को समृद्धि प्रदान करता है
३. सूर्य रेखा पर कोई भी क्रॉस नहीं होना चाहिए
३. भाग्य रेखा लम्बी और निर्दोष होनी चाहिए
४. हृदय रेखा के अंत और शुरुआत में शाखाये होनी चाहिए
५ अंगूठे में यव का चिन्ह होना चाहिए
६  मस्तिष्क  रेखा सीधी और लम्बी  होनी चाहिए तथा  अंत में उसके  शाखा होनी चाहिए
७ मछली का चिन्ह सुख और समृद्धि के लिए अच्छा मन जाता है
८ स्पष्ट मणिबंद रेखा होनी चाहिए

हथेली में और भी बहुत शुभ चिन्ह होते है पर इस लेख में हमने केवल कुछ सामान्य चिन्हों और रेखाओं के बारे में चर्चा की है ये भी जरूरी नहीं है की हथेली में ये सभी चिन्ह एक साथ पाए जाये

Friday, 31 May 2019

विज्ञान भैरव तंत्र ,meditation technique

नमस्कार पाठको आज हम इस लेख में बात करेंगे विज्ञानं  भैरव तंत्र ग्रन्थ  के बारे में ,  विज्ञान भैरव तंत्र कश्मीरी शैव सम्प्रदाय के त्रिक उपसम्प्रदाय का मुख्य ग्रन्थ है इस ग्रन्थ में ध्यान लगाने की विधियों का वर्णन है कुल ११२ विधिया है जो इस ग्रन्थ में  भगवान शिव ने माँ शक्ति को बताई है इस ग्रन्थ में माँ शक्ति भगवान् शिव से बहुत से प्रश्न पूछती है जैसे की हे प्रभु आपका का सत्य क्या है ?जीवन की धुरी क्या है ?ये आपका आश्चर्य भरा जगत क्या है और इसके उत्तर में भगवन शिव कहते है हे देवी मैं केवल आपको कुछ ध्यान की विधिया दे सकता हूँ जिनका उपयोग करके आप सारे प्रश्नो का उत्तर प्राप्त कर लेंगी






भगवान् शिव द्वारा बताई गयी ११२ ध्यान विधिया मानव जीवन के लिए भी बहुत उपयोगी है जिनका अभ्यास करके मानव भी ज्ञान को प्राप्त कर सकता है  ध्यान के लिए ये सारी विधियां नहीं अपनानी है कोई भी व्यक्ति ११२ विधियों में किसी  भी एक विधि का अभ्यास कर सकता है. हर विधि अपने आप में पूर्ण है इस लेख में मैं पहली विधि के बारे में बताने जा रहा हूँ

विधि -०१
भगवान् शिव  कहते है
हे देवी यह अनुभव दो  श्वासो के बीच घटित हो सकता है
श्वास के भीतर आने के पश्चात और बहार लौटने के ठीक पूर्व 

व्याख्या-

वैसे तो श्वास लेने की क्रिया दो भागो में विभाजित है एक श्वास का भीतर जाना और दूसरा श्वास का बहार आना पर अगर बहुत ध्यान से देखा जाये तो श्वास की क्रिया तीन भागो में विभाजित होती है एक श्वास का भीतर आना और कुछ क्षण के ठहर जाना और फिर बहार निकलना
श्वास के भीतर या बहार मुड़ने के पहले एक क्षण है जब हम श्वास नहीं लेते उसी क्षण यह अनुभव घटित हो सकता है हमको केवल अपनी श्वास का निरीक्षण करना है की श्वास किस तरह भीतर जाती और बहार निकलती कुछ अभ्यास के बाद हम जरूर उस बिंदु को प्राप्त कर सकते जहा श्वास ठहर जाती और उस क्षण को प्राप्त करने के बाद कोई भी प्रश्न अनुत्तरित नहीं रह जायेगा 

Saturday, 13 April 2019

हाथ मिलाने के तरीके से जाने दूसरे का व्यक्तित्व

नमस्कार पाठको,
 आज हम बात करेंगे की किस प्रकार हम हाथ मिलाने के तरीके से सामने वाले के  व्यक्तित्व को  जान सकते हैं वैसे तो केवल हाथ मिलाने से किसी के व्यक्तित्व के बारे में सब कुछ नहीं जाना  जा सकता है और जरूरी नहीं है की नीचे दिए गयी थ्योरी सभी व्यक्तियों पर सटीक बैठे किन्तु इस थ्योरी से आप दूसरे के व्यक्तित्व के बारे में एक अनुमान लगा सकते है

१. ढीला एवं लापरवाही से हाथ मिलाने वाला व्यक्ति
ऐसे व्यक्ति स्वार्थी ,चालक  या दूसरे में रूचि न लेने वाले हो सकते है स्वयं को ज्यादा होशियार समझते है और शंकालु प्रवत्ति के हो सकते है ऐसे व्यक्तियों में सुपीरियटी काम्प्लेक्स ज्यादा पाया जाता है जिद्दी एवं तानाशाही प्रवत्ति का हो सकता है 

२.कसकर हाथ मिलाने वाला व्यक्ति - 
ऐसे व्यक्ति दूसरे को बराबरी का दर्जा देते है दूसरों को सम्मान देते है और भरोसेमंद होते हैं
३. हाथ मिलकर लगातार हाथ हिलने वाला व्यक्ति - 
ऐसे व्यक्ति लापरवाह होते है किन्तु दिल के बहुत साफ होते है ऐसे व्यक्ति को आसानी से मुर्ख बनाया जा सकता बहुत संवेदनशील होते है संसार में क्या हो रहा है ,इसकी उनको चिंता ही नहीं रहती है

. सैंडविच तरीके से हाथ मिलाने वाला व्यक्ति -
ऐसे व्यक्ति अवसरवादी होते है लोगे से बात करके अपना काम निकलाने में वो माहिर होते है व्यापर करने में ऐसे व्यक्ति बहुत सफल होते है दूसरोको अपनी बातों से आकर्षित कर लेते है

५ एक हाथ मिलाते हुए  दूसरा हाथ सामने  वाले के हाथ  पर किसी जगह रखने वाला व्यक्ति -
ऐसा व्यक्ति बहुत अच्छे स्वभाव वाला होता है यह सामने वाले का हितैषी होता है सामने वाले का शुभ चिंतक होता है सामने वाले की यथशक्ति मदद करने वाला होता है
नीचे से खुली हथेली से हाथ मिलाने वाला व्यक्ति - बहुत जल्दी विचलित होते है सहज स्वभाव के होते हैं हीनभावना से ग्रस्त हो सकता है दूसरों की बातों में आसानी से आ जाते हैं

Wednesday, 5 September 2018

६ सितम्बर 2018 से शनि होंगे मार्गी लाएंगे नयी सौगाते




आज हम इस लेख में बात करेंगे शनि देव के मार्गी होने परहमारे ऊपर क्या प्रभाव  पड़ेंगे  सबसे पहले ये समझना जरूरी है की मार्गी  और वक्री से क्या अभिप्राय है अगर कोई अपने मार्ग पर सीधा चलता है तो उसे मार्गी कहेंगे और उल्टा चलता है तो उसे वक्री कहेंगे पर यहाँ ये समझ लेना जरूरी है की कोई ग्रह उल्टा नहीं चलता पर कभी कभी कुछ समय के लिए  पृथ्वी से देखने पर सापेक्ष वेग के कारण वो पृथ्वी से उल्टी  दिशा में प्रतीत होता दिखाई देता है १८ अप्रैल २०१८ से शनि देव वक्री हो गए थे जो की अब ६ सितम्बर २०१८ से मार्गी हो जायेंगे ज्योतिष में शनि बहुत  धीरे धीरे चलने वाले माने गए है वक्री होने पर ये और भी धीरे हो जाते है और बहुत सी चीजों की प्रगति को धीमा कर देते है पर अब ६ सितम्बर  से शनि देव मार्गी हो जायेंगे जिस से की आम लोगे के रुके हुए काम बनना शुरू हो जायेंगे सरकारी योजनाए ,नौकरियों की कमी दूर होंगी  बहुत सारी नयी योजनाए लागू होंगी विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी आएगी अब १२ राशियों पर शनि के मार्गी होने के प्रभाव पर चर्चा करते है
मेष राशि - भाग्य में वृद्धि होगी कम मेहनत  में ज्यादा फायदा होगा 
वृष राशि - निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी जिस से की आपके रुके कार्य बनेंगे 
मिथुन राशि -शनि से सम्बंधित व्यवसाय लाभ देंगे,शादी में रुकावट दूर होंगी , धन लाभ हो सकता है 
कर्क राशि -रोग ऋण और शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकते है 
सिंह राशि -शिक्षा में वृद्धि ,पिता से मतभेद  कम होंगे ,प्रसिद्धि मिल सकती है 
कन्या राशि -भौतिक सुखो में वृद्धि ,पिता को कष्ट हो सकता है यात्राए सफल होंगी 
तुला राशि- संतान सुख में वृद्धि ,पारिवारिक सुखो में वृद्धि 
वृश्चिक राशि -रुका हुआ धन शत्रु विजय हो सकती है. 
 धनु राशि -मान सम्मान में वृद्धि ,आत्मविश्वास में वृद्धि होगी 
मकर राशि -रुके हुए कार्य बनेगे,निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी
कुम्भ राशि -नयी योजनाओं के रास्ते खुलेंगे, यात्राऐ होंगी ,
मीन राशि -रुके हुए कार्य बनेगे ,दूसरों के मामले में  दखल न दे 
इस लेख में हमने सभी राशियों पर शनि के मार्गी होने के सामान्य प्रभावों की चर्चा की है 






Tuesday, 3 July 2018

हथेली में व्यापार करने के संकेत




आज हम इस लेख में बात करेंगे की ऐसे कौन  से संकेत होते है हथेली में जिस से की ये पता चले की व्यक्ति के अंदर व्यापार करने के गुण  है की नहीं। सबसे पहले हमे ये समझना चाहिए की एक व्यापारी बन ने के लिए बुनियादी  क्या क्या गुण होने चाहिए
जोखिम लेने की क्षमता ,मानसिक मजबूती ,चतुराई ,न ज्यादा आदर्शवादी न ज्यादा स्वार्थी , स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता ये सब कुछ बुनियादी गुण है जिन्हे हम हथेली के माध्यम से चर्चा करेंगे
१. हथेली में मस्तिष्क रेखा बहुत झुकी हुयी नहीं होनी चाहिए अगर मस्तिष्क रेखा बुध पर्वत की ओर जा रही  या उस से निकल कर कोई शाखा बुध पर्वत की ओर जा रही हो तो यह अच्छा गुण माना जाता है व्यापर करने के लिए
२. ह्रदय रेखा शनि और गुरु पर्वत के बीच से निकालनी चाहिए क्यों की ऐसी स्थिति में व्यक्ति न ज्यादा आदर्शवादी होता है और न ही ज्यादा स्वार्थी
३. अनामिका ऊँगली ज्यादा छोटी नहीं होनी चाहिए क्यों ज्यादा छोटी अनामिका उंगली जोखिम लेने की क्षमता को कम  करती है
४. कनिष्ठा ऊँगली भी ज्यादा छोटी नहीं होनी चाहिए बुध पर्वत या बुध की उंगली पर शुभ निशान जैसे त्रिकोण ,चतुर्भुज ,मतस्य का चिन्ह होना अच्छा माना जाता है
५ कनिष्ठा ऊँगली अनामिका ऊँगली से दूर होनी चाहिए
६ अंगूठे का पहला पोर बड़ा होना चाहिए जो की इच्छा शक्ति को दर्शाता है
७ उँगलियों का दूसरा पोर बड़ा होना चाहिए
८ बुध रेखा मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा द्वारा मिलकर बना  त्रिकोण अच्छा संकेत है अच्छा व्यापारी बन ने के लिए
* उंगलियों के पोरो के बारे में अधिक पढ़ने के लिए
http://ashishastrologer.blogspot.com/2013/07/significance-of-phalanges-in-finger.html

Friday, 29 June 2018

एक साथ न पहने जाने वाले रत्न(odd combinations of Gemstones )




आज हम इस लेख में बात करेंगे एक साथ न पहने जाने वाले रत्नो के बारे में कभी कभी हम अज्ञात वश ऐसे दो रत्न पहन लेते है जो  नहीं पहने जा सकते जिस से की हमे फायदा होने की बजाये नुकसान होने लगता है 
जैसे 
१- मंगल ग्रह का रत्न मूंगा और बुध ग्रह का पन्ना  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए  है 
२ -चंद्र ग्रह का मोती और शनि ग्रह का नीलम  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए  है 
३ -चंद्र ग्रह का मोती और बुध ग्रह का पन्ना  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
४-सूर्य का माणिक्य और शनि का नीलम  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
५-सूर्य का माणिक्य और शुक्र का हीरा  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
६- मंगल ग्रह का मूंगा और शनि ग्रह का नीलम एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
७- शुक्र ग्रह  का हीरा और गुरु का पुखराज  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
८-गुरु ग्रह का पुखराज और शनि का नीलम  एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
९ -चंद्र ग्रह का मोती और राहु का गोमेद एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 
१० मंगल ग्रह का मूंगा और राहु का गोमेद एक साथ नहीं पहना जाना चाहिए 

Thursday, 21 December 2017

गण्ड मूल नक्षत्र एवं पूजन

आज हम इस लेख में गण्ड मूल नक्षत्र के बारे में बताने जा रहे है गण्ड मूल नक्षत्र के बारे में तरह तरह की भ्रांतिया फैली हुयी है मेरे इस लेख का उद्देश्य उन भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश करना है
ज्योतिष में १२ राशि और २७ नक्षत्र है और प्रत्येक नक्षत्र के ४  चरण होते है ज्योतिष में एक राशि का विस्तार  ३० डिग्री है जबकि प्रत्येक नक्षत्र का विस्तार १३ डिग्री २० अंश होता है जब कोई राशि और नक्षत्र एक स्थान पर समाप्त होते है तब उस स्थिति को गण्ड नक्षत्र और जब इसी स्थान से नया नक्षत्र शुरू होता है तब इस स्थिति को  मूल कहते है २७ नक्षत्रो में ६ नक्षत्र ही गण्ड मूल नक्षत्र कहलाये जाते है जिनमे ३ गण्ड और ३ मूल नक्षत्र कहे जाते है वो इस प्रकार है  
१.अश्वनी  (केतु स्वामी ) इस नक्षत्र के पहले चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है 
२.अश्लेषा  (बुध) इस नक्षत्र के  चौथा चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है 

३ मघा ,(केतु )इस नक्षत्र के  पहला  चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
४ मूल ,(केतु)इस नक्षत्र के  पहला चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
५. ज्येष्ठा ,(बुध)इस नक्षत्र के  चौथा चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
६ रेवती (बुध)इस नक्षत्र के  चौथा चरण में जन्मे बच्चे के नक्षत्र का  पूजन जरूरी होता है
गण्ड मूल नक्षत्र के  प्रभावों के बारे में बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है ज्योतिष में परम्परागत ज्योतिषचार्यों ने अपने अनुभवों के अनुसार इन नक्षत्रो के प्रभावों का विवेचन किया है गण्ड  मूल नक्षत्र को शांत करने पूजा विधि है यदि कोई पूजा नहीं करवा पाता है तो उसे कम से काम अपने नक्षत्र के स्वामी ग्रह की पूजा अवश्य करनी चाहिए पूजा करवाने के लिए विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए



Sunday, 19 November 2017

हथेली के चिन्हो से जानिये धन योग

इस लेख में हम कुछ ऐसे चिन्हो के बारे में बताएँगे जिस से आप जान सकेंगे की क्या आपके भाग्य में धन योग है 
हथेली के चिन्हो से जानिये धन योग
1.   हथेली में गुरु पर्वत पर स्टार चिन्ह होना बहुत ही शुभ संकेत देता है धन, सम्पति और यश  संबध में 
२.  हथेली में सूर्य पर्वत पर स्टार  चिन्ह होना भी बहुत शुभदायक माना जाता धन सम्पति और यश के सम्बन्ध में 
3. यदि कोई रेखा जीवन रेखा से निकल कर गुरु पर्वत पर जाती है ऐसी रेखाओ को उन्नति की रेखा कहा जाता और जिसके हथेली में ऐसी  रेखाएं होती ऐसा व्यक्ति लगातार उन्नति करता रहता है 
4 .जीवन रेखा के अंदर बने त्रिभुज के  चिन्ह भी धन के योग का संकेत देते है 
5 . शनि की तरफ जाती हुयी जीवन रेखा से छोटी छोटी रेखाएं भी उन्नति का संकेत देती है पर इन उन्नतियों को पाने के लिए व्यक्ति को कठिन परिश्रम करना पड़ता है 
6.  सूर्य रेखा पर स्टार का चिन्ह जीवन में बहुत यश का प्रतीक होता है 
7 .बुध पर्वत पर एक खड़ी रेखा भी धन योग का प्रतीक होती है 

**ये चिन्ह केवल संकेतक है सही दिशा और कठिन परिश्रम से किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है